Chhath Puja का महत्व
Chhath Puja, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बड़े धूमधाम से मनाया जाने वाला एक प्रमुख लोकपर्व है। यह पर्व सूर्य भगवान और छठ माता को समर्पित होता है। चार दिन तक चलने वाला यह उत्सव व्रति, व्रतिनी और उनके परिवार की भक्ति, संयम और तपस्या का प्रतीक है।
Chhath Puja का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
छठ पूजा (Chhath Puja) का उद्भव
Chhath Puja का इतिहास बहुत पुराना है। ऐसा माना जाता है कि यह पर्व सूर्य देव और छठ माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। लोककथाओं के अनुसार, सूर्य देव को अर्घ्य देने से जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है।
धार्मिक मान्यताएँ
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि छठ पूजा से बुराइयाँ दूर होती हैं और परिवार में सौभाग्य आता है। यह पर्व व्रतियों को संयम और तपस्या की ओर प्रेरित करता है।
Chhath Puja कब मनाई जाती है
पंचांग और तिथियाँ
Chhath Puja कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी से लेकर सप्तमी तक मनाई जाती है। हर वर्ष यह तिथि ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार बदलती रहती है।
2025 में छठ पूजा की तारीखें
2025 में Chhath Puja की तिथि इस प्रकार है:
- नहाय-खाय: 26 अक्टूबर 2025
- खरना: 27 अक्टूबर 2025
- संध्या अर्घ्य: 28 अक्टूबर 2025
- उषा अर्घ्य: 39 अक्टूबर 2025
नहाय-खाय: पहला दिन का महत्व
नहाय-खाय का इतिहास
नहाय-खाय छठ पूजा का पहला दिन है। इस दिन व्रति शुद्धि के लिए स्नान करता है और शुद्ध भोजन ग्रहण करता है। यह दिन व्रतियों के संयम और तपस्या की नींव रखता है।
2025 में नहाय-खाय की तिथि
इस वर्ष नहाय-खाय 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
नहाय-खाय का विधि-विधान
- व्रति को गंगा या किसी पवित्र जलाशय में स्नान करना चाहिए।
- शुद्ध और सात्विक भोजन किया जाता है।
- इस दिन मांस, अंडा और मिर्च-मसाले से परहेज़ करना चाहिए।
खरना: दूसरे दिन का महत्व
खरना की तैयारी
खरना व्रति की दूसरी प्रक्रिया है जिसमें रात के व्रत को समाप्त किया जाता है। यह दिन विशेष रूप से गुड़ और केला जैसे प्रसाद के साथ मनाया जाता है।
प्रसाद और व्रत नियम
- व्रति संपूर्ण दिन निर्जल रहकर सूर्यास्त के बाद विशेष प्रसाद ग्रहण करते हैं।
- प्रसाद में मुख्यत: रोटी, खीर और फल शामिल होते हैं।
संध्या अर्घ्य: तीसरे दिन की प्रक्रिया
संध्या अर्घ्य का महत्व
संध्या अर्घ्य छठ पूजा का प्रमुख दिन है। व्रति और व्रतिनी सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण करने की प्रार्थना करते हैं।
सूर्य को अर्घ्य देने का सही समय
संध्या अर्घ्य सूर्यास्त के समय दिया जाता है। इस समय घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा होती है।
उषा अर्घ्य: चौथे दिन का महत्व
सुबह का पूजन और सूर्य को अर्घ्य
उषा अर्घ्य सुबह सूर्योदय के समय दिया जाता है। यह व्रत का अंतिम दिन होता है और व्रति अपनी पूरी भक्ति के साथ सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं।
व्रती का नियम और सावधानियाँ
- व्रति को सुबह के समय ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए।
- अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है।
छठ पूजा में विशेष रीतियाँ और परंपराएँ
घाट सजाना और पूजन सामग्री
- घाट को फूलों, बैजनी और मिट्टी के दीपकों से सजाया जाता है।
- पूजन में गन्ना, खरबूजा, केले, गुड़ और जल प्रमुख सामग्री होती है।
गीत-संगीत और भजन
- छठ पूजा के दौरान लोकगीत और भजन गाए जाते हैं।
- विशेष रूप से “छठ गीत” व्रति और परिवार की भक्ति को बढ़ाते हैं।
छठ पूजा में आम लोगों की भागीदारी
परिवार और समाज का योगदान
छठ पूजा में पूरा परिवार और समाज शामिल होता है। हर कोई व्रति की मदद करता है, घाट सजाता है और प्रसाद बनाने में योगदान देता है।
बच्चों और युवाओं की भूमिका
बच्चे और युवा इस पर्व में उत्साह और ऊर्जा जोड़ते हैं। वे गीत गाते, झंडा सजाते और व्रति की सेवा करते हैं।
छठ पूजा का स्वास्थ्य और आहार पर प्रभाव
व्रत और संयम
व्रतियों को चार दिन तक संयमित आहार और निर्जल व्रत का पालन करना पड़ता है। इससे शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं।
स्वास्थ्य के लिए सावधानियाँ
- निर्जल व्रत के दौरान पानी का सही समय पर सेवन आवश्यक है।
- प्रसाद का सेवन संतुलित मात्रा में करना चाहिए।
छठ पूजा में आम कंफ्यूजन: नहाय-खाय और तिथियाँ
क्यों होती हैं गलतफहमियाँ
छठ पूजा की तिथियाँ चंद्र कैलेंडर पर आधारित होती हैं। इसलिए लोगों को कभी-कभी भ्रम होता है कि कौन सा दिन किस प्रक्रिया का है।
2025 में स्पष्ट दिशानिर्देश
इस वर्ष नहाय-खाय 26 अक्टूबर, खरना 27 अक्टूबर, संध्या अर्घ्य 28 अक्टूबर और उषा अर्घ्य 29 अक्टूबर को हैं।
छठ पूजा का महत्व आज के समय में
आधुनिक जीवन में छठ का प्रभाव
छठ पूजा आज भी लोगों को मानसिक शांति और संतुलन देती है। यह पर्व हमें प्राकृतिक तत्वों और सूर्य देव के महत्व की याद दिलाता है।
सामाजिक और पारिवारिक महत्व
छठ पूजा परिवार और समाज को एकजुट करती है। लोग मिलकर उत्सव मनाते हैं, सहयोग करते हैं और सामाजिक समरसता बढ़ाते हैं।
छठ पूजा से जुड़ी कहानियाँ और लोककथाएँ
प्रसिद्ध कथाएँ
लोककथाओं में छठ माता की कृपा और सूर्य देव की महिमा का वर्णन मिलता है।
लोकमान्यताएँ
- व्रति की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
- परिवार में सुख और समृद्धि आती है।
छठ पूजा में पर्यावरण की भूमिका
घाटों की स्वच्छता
घाटों की साफ-सफाई से पर्यावरण सुरक्षित रहता है।
प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा
प्रकृति के संसाधनों का संरक्षण और उत्सव का पर्यावरण अनुकूल आयोजन जरूरी है।
निष्कर्ष
छठ पूजा न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह सामाजिक, पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी देता है। 2025 में इस पर्व की सही तिथियों का पालन करके आप अपने व्रत और पूजा को पूरी भक्ति और शुद्धता के साथ कर सकते हैं।
FAQs
1. छठ पूजा 2025 में कब शुरू हो रही है?
छठ पूजा 26 अक्टूबर 2025 से शुरू हो रही है।
2. नहाय-खाय का महत्व क्या है?
यह छठ पूजा का पहला दिन है, जिसमें व्रति शुद्ध स्नान और सात्विक भोजन करते हैं।
3. 2025 में संध्या अर्घ्य कब होगा?
संध्या अर्घ्य 28 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा।
4. उषा अर्घ्य का सही समय कब है?
उषा अर्घ्य सूर्योदय के समय दिया जाता है।
5. छठ पूजा में किन सावधानियों का पालन करना चाहिए?
निर्जल व्रत का पालन, संतुलित आहार और घाटों की स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है।

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