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Devshayani Ekadashi 2025: 5 या 6 जुलाई, देवशयनी एकादशी कब, किस मुहूर्त में करें भगवान विष्णु की पूजा

देवशयनी Ekadashi 2025: संपूर्ण जानकारी

देवशयनी Ekadashi क्या है?

देवशयनी एकादशी हिन्दू धर्म की प्रमुख एकादशियों में से एक है। यह आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने तक विश्राम करते हैं, जिसे चातुर्मास कहा जाता है।

Devshayani Ekadashi 2025: 5 या 6 जुलाई, देवशयनी एकादशी कब, किस मुहूर्त में करें भगवान विष्णु की पूजा

Ekadashi व्रत का महत्व

हिन्दू धर्म में वर्ष भर में 24 एकादशियाँ होती हैं और हर एकादशी का विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व होता है। खासकर देवशयनी एकादशी को मोक्षदायिनी माना जाता है।

'देवशयनी' नाम का अर्थ

‘देव’ मतलब भगवान और ‘शयनी’ का अर्थ है ‘सोने वाला’। यानी इस दिन से भगवान विष्णु विश्राम अवस्था में चले जाते हैं।

2025 में देवशयनी Ekadashi कब है?

पंचांग अनुसार तिथि और दिनांक

आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि वर्ष 2025 में 5 जुलाई (शनिवार) को प्रारंभ हो रही है और 6 जुलाई (रविवार) को समाप्त हो रही है।

5 या 6 जुलाई? असमंजस का समाधान

व्रत करने वालों के लिए यह भ्रम हो सकता है कि एकादशी 5 जुलाई को रखें या 6 जुलाई को। यदि एकादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व है, तो व्रत उसी दिन किया जाता है। पंचांग के अनुसार, 2025 में 5 जुलाई को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान होगी, अतः व्रत इसी दिन रखा जाएगा।

देवशयनी Ekadashi पूजा का शुभ मुहूर्त

पूजन का प्रारंभ और समाप्ति समय

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 5 जुलाई 2025 को प्रातः 01:33 बजे
  • तिथि समाप्ति: 6 जुलाई 2025 को प्रातः 03:45 बजे

अभिजीत मुहूर्त और प्रदोष काल का महत्व

  • अभिजीत मुहूर्त (पूजा हेतु): दोपहर 11:57 से 12:53 तक
  • प्रदोष काल पूजा: संध्या 07:00 बजे से 08:15 बजे तक

व्रत और पूजा की विधि

एक दिन पूर्व की तैयारी

  • सात्विक भोजन करें
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • मानसिक और शारीरिक शुद्धता बनाए रखें

Ekadashi के दिन की पूजा विधि

  • प्रातः स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें
  • भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को गंगाजल से स्नान कराएं
  • तुलसी, पीला पुष्प, पीतांबर अर्पित करें
  • विष्णु सहस्रनाम, विष्णु अष्टोत्तर शतनाम, गीता का पाठ करें

द्वादशी का पारण और विशेष ध्यान

  • द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें
  • अन्न, जल, दान, गाय-सेवा करना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है

भगवान विष्णु की पूजा में क्या करें?

पूजन सामग्री की सूची

  • तुलसी पत्ता
  • पीला वस्त्र
  • गंगाजल
  • फल, मिठाई
  • दीपक, धूप, घी

मंत्र और पाठ

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
  • गीता के अध्याय 12 का पाठ श्रेष्ठ माना जाता है

देवशयनी Ekadashi और चातुर्मास का संबंध

चार मासों का व्रतकाल कैसे शुरू होता है?

चातुर्मास में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी तक विश्राम करते हैं। इस काल में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते।

क्या करें और क्या न करें चातुर्मास में?

  • तामसिक भोजन, प्याज-लहसुन से परहेज
  • ब्रह्मचर्य और व्रत-उपवास का पालन
  • सत्संग, दान और भजन-कीर्तन करना श्रेष्ठ

पौराणिक कथा: देवशयनी Ekadashi की कथा

राजा मान्धाता की कथा

एक समय राजा मान्धाता के राज्य में सूखा पड़ा। ऋषियों ने सलाह दी कि राजा को देवशयनी एकादशी का व्रत करना चाहिए। व्रत के प्रभाव से वर्षा हुई और प्रजा सुखी हुई।

विष्णु भगवान की निद्रा की कथा

देवताओं ने भगवान विष्णु से विश्राम का अनुरोध किया। तब उन्होंने चार माह तक योगनिद्रा में रहने का वचन दिया। इस काल को चातुर्मास कहा जाता है।

धार्मिक मान्यताएं और लाभ

पुण्य प्राप्ति और मोक्ष

यह व्रत करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसे सहस्र अश्वमेध यज्ञ के बराबर फलदायक कहा गया है।

जीवन में आने वाले सुखद बदलाव

मान्यता है कि इस व्रत को करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है, आर्थिक समस्याएँ दूर होती हैं और स्वास्थ्य में सुधार होता है।

अन्य प्रमुख एकादशियाँ

हरिशयनी और देवोत्थान एकादशी

देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है, जबकि देवोत्थान एकादशी नवंबर में आती है, जब भगवान विष्णु पुनः जाग्रत होते हैं।

व्रत रखने के स्वास्थ्य लाभ

  • उपवास से पाचनतंत्र को आराम मिलता है
  • मानसिक एकाग्रता बढ़ती है
  • शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं

सामान्य प्रश्न और भ्रांतियाँ

  • क्या सभी लोग व्रत कर सकते हैं? हाँ, लेकिन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए
  • क्या सिर्फ फलाहार किया जा सकता है? हाँ, निर्जल या फलाहारी व्रत विकल्प हैं

निष्कर्ष: क्यों खास है देवशयनी एकादशी?

देवशयनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं है, यह भगवान के साथ जुड़ने का अवसर है। यह दिन भक्तों के लिए भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और अपने जीवन में शांति, समृद्धि और मोक्ष की ओर बढ़ने का पर्व है। 2025 में यह व्रत 5 जुलाई को किया जाएगा — आइए, संकल्प लें और इस शुभ अवसर का लाभ उठाएं।


FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. देवशयनी एकादशी 2025 में किस दिन है?
5 जुलाई 2025, शनिवार को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी।

2. इस दिन भगवान विष्णु की कौन सी विशेष पूजा करनी चाहिए?
विष्णु सहस्रनाम, तुलसी अर्चन और पीले वस्त्र अर्पण करना उत्तम होता है।

3. क्या महिलाएं और बच्चे व्रत कर सकते हैं?
हाँ, यदि स्वास्थ्य अनुकूल हो तो सभी व्रत कर सकते हैं।

4. व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद पारण करना चाहिए।

5. क्या इस दिन कथा सुनना जरूरी है?
हाँ, देवशयनी एकादशी की कथा सुनना व्रत को पूर्णता देता है।