Bharat Bandh आज: 10 ट्रेड यूनियनों की हड़ताल – उनकी मुख्य मांगें और श्रम कोड की समस्याएं
देशभर में आज का दिन एक बड़ी हड़ताल का गवाह बना है, जहां Bharat की 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त रूप से ‘Bharat Bandh’ का आह्वान किया है। यह सिर्फ एक बंद नहीं बल्कि मजदूरों के अधिकारों की गूंज है।
Bharat बंद का इतिहास
Bharat बंद कोई नया शब्द नहीं है। आज़ादी के बाद से ही यह एक जनसामूहिक विरोध का तरीका रहा है, जिसे राजनीतिक पार्टियां, संगठन और यूनियनें समय-समय पर अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए इस्तेमाल करती रही हैं।
Bharat बंद और लोकतंत्र
लोकतंत्र में विरोध का अधिकार मौलिक है। भारत बंद उसी अधिकार की एक मिसाल है जहां आम नागरिक, संगठन, मजदूर और कर्मचारी एक मंच पर अपनी समस्याएं उजागर करते हैं।
10 ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का उद्देश्य
यूनियन कौन-कौन सी हैं?
हड़ताल में हिस्सा लेने वाली यूनियनों में शामिल हैं:
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भारतीय मजदूर संघ (BMS) को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख यूनियनें
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भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC)
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सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU)
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हिंद मजदूर सभा (HMS)
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ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC)
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और अन्य क्षेत्रीय संगठन
इस बार की हड़ताल क्यों खास है?
इस बार हड़ताल केवल वेतन या महंगाई के खिलाफ नहीं है। यह श्रम कोड, निजीकरण और बेरोजगारी जैसे मूलभूत मुद्दों पर आधारित है, जो सीधे हर कामगार को प्रभावित करते हैं।
ट्रेड यूनियनों की मुख्य मांगें
नई श्रम संहिता का विरोध
चार नए लेबर कोड — जो पहले के 29 कानूनों को समेटकर बनाए गए हैं — को लेकर ट्रेड यूनियनें विरोध कर रही हैं। उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों के अधिकारों में कटौती होगी।
न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा
सभी कामगारों के लिए न्यूनतम ₹21,000 वेतन की मांग, साथ ही असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को भी PF और ESI जैसी सुरक्षा देने की मांग की गई है।
निजीकरण का विरोध
रेलवे, बैंक, बीमा और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण का जोरदार विरोध किया जा रहा है। यूनियनें कहती हैं कि यह आम जनता की संपत्ति का हनन है।
रोजगार सुरक्षा की मांग
ठेके पर काम करने वाले और गिग वर्कर्स (Zomato, Swiggy, Ola जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े) के लिए स्थायी रोजगार और सुरक्षा की मांग भी प्रमुख है।
श्रम संहिता (Labour Code) से जुड़ी विवादास्पद बातें
चार लेबर कोड्स की संक्षिप्त जानकारी
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Code on Wages
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Industrial Relations Code
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Occupational Safety, Health and Working Conditions Code
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Social Security Code
कर्मचारियों को कैसे प्रभावित करती है नई संहिता
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काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 किए जा सकते हैं।
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ओवरटाइम की सीमा और नियमों में बदलाव।
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यूनियन पंजीकरण के लिए सदस्य संख्या बढ़ाई गई।
ट्रेड यूनियनों की राय
ट्रेड यूनियनों का कहना है कि ये कोड "कारपोरेट समर्थक" हैं और मजदूरों के हितों की अनदेखी करते हैं।
हड़ताल से किन-किन क्षेत्रों पर पड़ा असर
बैंकिंग और बीमा क्षेत्र
सरकारी बैंकों और बीमा कंपनियों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। कई राज्यों में ATM खाली रहे और ग्राहक परेशान हुए।
परिवहन और रेल सेवाएं
कई राज्यों में बस सेवाएं रुकी रहीं। ट्रेनों की आवाजाही भी बाधित हुई।
शिक्षा और स्वास्थ्य
सरकारी स्कूल, कॉलेजों और अस्पतालों में कामकाज धीमा पड़ा। कई जगहों पर नर्सिंग स्टाफ और क्लर्क्स ने भी समर्थन में छुट्टी ली।
सरकार की प्रतिक्रिया और कार्रवाई
सरकार ने इस हड़ताल को "अनावश्यक और राष्ट्रविरोधी" बताते हुए कहा कि लेबर कोड सुधारों का मकसद ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाना और निवेश को आकर्षित करना है।
आम जनता की प्रतिक्रिया
कुछ लोग इस बंद से परेशान हुए, तो कई लोगों ने इसे मजदूरों की आवाज बताया। सोशल मीडिया पर भी इस हड़ताल को लेकर बहस जारी रही।
सोशल मीडिया और मीडिया कवरेज
Twitter और Facebook पर #BharatBandh ट्रेंड करता रहा। न्यूज़ चैनलों ने भी लाइव कवरेज दी जिसमें कई जगहों से पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की खबरें आईं।
भविष्य की रणनीति – क्या होगा आगे?
यूनियनें कह रही हैं कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो यह आंदोलन देशव्यापी आंदोलन में बदल सकता है। आने वाले चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
यह भारत बंद सिर्फ एक दिन की हड़ताल नहीं है, बल्कि मजदूरों की गूंजती हुई आवाज़ है। जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक ये विरोध जारी रहेंगे। सरकार को चाहिए कि वह संवाद और समावेशी नीति अपनाकर समाधान की ओर बढ़े।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1: भारत बंद में किन-किन संगठनों ने भाग लिया?
A1: 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों जैसे INTUC, CITU, AITUC, HMS आदि ने भाग लिया।
Q2: ट्रेड यूनियनें श्रम कोड का विरोध क्यों कर रही हैं?
A2: यूनियनें मानती हैं कि नए लेबर कोड कर्मचारियों के अधिकारों को कम करते हैं।
Q3: क्या निजीकरण से कर्मचारियों को नुकसान होगा?
A3: यूनियनों के अनुसार, निजीकरण से रोजगार की अस्थिरता और सुरक्षा में कमी आएगी।
Q4: क्या आम जनता इस हड़ताल से प्रभावित हुई?
A4: हां, बैंक, परिवहन और स्कूल जैसे कई सेवाएं प्रभावित हुईं।
Q5: आगे की रणनीति क्या है?
A5: अगर मांगें पूरी नहीं होतीं, तो यूनियनें देशव्यापी आंदोलन की योजना बना रही हैं।
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