Ticker

20/recent/ticker-posts

पुरी Rath Yatra कल: 200 से ज्यादा लोग 58 दिनों में तैयार करते हैं रथ, जानिए यात्रा के बाद क्या होता है इन रथों का?

पुरी Rath Yatra – परंपरा, आस्था और भव्यता का संगम

पुरी की Rath Yatra ना केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा की एक अद्वितीय मिसाल है। हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए ओडिशा के पुरी नगर में एकत्र होते हैं, और विशाल रथों को खींचकर भगवान को गुंडिचा मंदिर तक ले जाते हैं।

पुरी Rath Yatra कल: 200 से ज्यादा लोग 58 दिनों में तैयार करते हैं रथ, जानिए यात्रा के बाद क्या होता है इन रथों का?

Ratha Yatr का इतिहास और धार्मिक महत्व

रथयात्रा की शुरुआत कैसे हुई?

पुरी Rath Yatra की परंपरा हजारों साल पुरानी है। यह माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण की लीला के रूप में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ पर सवार होकर अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) जाते हैं।

भगवान जगन्नाथ से जुड़ी मान्यताएँ

भगवान जगन्नाथ को श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है। उनका रथयात्रा पर निकलना भक्तों के लिए ऐसा है जैसे स्वयं ईश्वर उनसे मिलने चल पड़े हों।

Rath Yatra की तैयारी: अद्भुत शिल्प और समर्पण

रथ निर्माण प्रक्रिया कब और कैसे शुरू होती है?

रथ बनाने की प्रक्रिया अक्षय तृतीया से शुरू होती है। इस दिन "रथ निर्माण" का पहला दिन होता है और इसे बेहद शुभ माना जाता है।

रथ बनाने वाले लोग कौन होते हैं?

रथ केवल 'विश्वकर्मा' वंशज बढ़ई परिवारों द्वारा ही बनाए जाते हैं। ये परिवार पीढ़ियों से इस परंपरा को निभा रहे हैं।

58 दिनों तक चलने वाली मेहनत

करीब 200 से ज्यादा कारीगर दिन-रात मेहनत करते हैं और 58 दिनों में तीनों रथ तैयार किए जाते हैं। इसमें नक्काशी, चित्रकारी, लकड़ी की फिटिंग और सजावट शामिल होती है।

रथों की विशेषताएं और वास्तुकला

तीन मुख्य रथ: नन्दीघोष, तालध्वज और दर्पदलन

  • नन्दीघोष – भगवान जगन्नाथ का रथ, 16 पहियों वाला
  • तालध्वज – बलभद्र का रथ, 14 पहियों वाला
  • दर्पदलन – सुभद्रा का रथ, 12 पहियों वाला

प्रत्येक रथ की लंबाई, ऊँचाई और लकड़ी की किस्में

रथों के निर्माण में साल, नीम और सिंचुआ लकड़ी का उपयोग होता है। हर रथ की ऊंचाई लगभग 45 फीट होती है और ये बेहद भारी होते हैं।

Rath Yatra का आयोजन कैसे होता है?

कौन करता है आयोजन की निगरानी?

पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन द्वारा आयोजन होता है, जिसकी निगरानी राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन करता है।

लाखों श्रद्धालुओं की भीड़: सुरक्षा और व्यवस्था

रथयात्रा के दौरान लाखों लोग पुरी पहुंचते हैं, इसलिए सुरक्षा के लिए हजारों पुलिसकर्मी, सीसीटीवी और हेलीकॉप्टर से निगरानी की जाती है।

Rath Yatra के बाद इन रथों का क्या होता है?

क्या इन रथों का दोबारा उपयोग होता है?

नहीं, हर वर्ष नए रथ बनाए जाते हैं। पुराने रथों का दोबारा उपयोग नहीं होता।

पुरानी लकड़ी का क्या किया जाता है?

पुरानी लकड़ी को मंदिर में पूजनीय वस्तुओं के रूप में रखा जाता है या मंदिर की मरम्मत में उपयोग किया जाता है।

धार्मिक दृष्टिकोण से इसका महत्व

धार्मिक दृष्टिकोण से हर वर्ष नए रथ बनाना "नवीनता" और "पवित्रता" का प्रतीक माना जाता है।

रथ निर्माण से जुड़ी मान्यताएं और परंपराएं

केवल विशिष्ट परिवारों को ही अनुमति क्यों?

ऐसा माना जाता है कि जिनके पूर्वजों को भगवान जगन्नाथ ने आदेश दिया था, केवल वही परिवार रथ निर्माण का कार्य कर सकते हैं।

रथ निर्माण में प्रयुक्त औजार भी विशेष क्यों होते हैं?

औजार भी मंदिर में पूजा करके उपयोग किए जाते हैं, जो इन्हें पवित्र बनाता है।

पर्यावरणीय दृष्टिकोण: इतनी लकड़ी का उपयोग क्या सही है?

क्या होता है वृक्षारोपण का नियम?

मंदिर प्रशासन हर वर्ष वृक्षारोपण करता है और लकड़ी की कटाई एक विशेष योजना के तहत होती है जिससे पर्यावरण को नुकसान न हो।

देश-विदेश से भक्तों का आगमन और उनका अनुभव

अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों से भी भक्त पुरी आते हैं। उनके लिए यह एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा होती है।

मीडिया और तकनीक की भूमिका

रथयात्रा का सीधा प्रसारण अब टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर होता है जिससे विश्वभर में लोग इसका आनंद ले सकते हैं।

समापन: रथयात्रा से मिलने वाले आध्यात्मिक संदेश

पुरी रथयात्रा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह भक्ति, सेवा और समाज के लिए एकता का प्रतीक है। यह हमें सिखाती है कि जब हम सभी मिलकर एक दिशा में खींचते हैं, तो भगवान भी हमारे साथ चलते हैं।

निष्कर्ष

पुरी की रथयात्रा भारतीय संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। इसमें समर्पण, परंपरा, आस्था और शिल्पकला का अद्भुत समावेश होता है। रथ निर्माण से लेकर उनकी विदाई तक हर चरण एक गहरी आस्था और मेहनत की कहानी कहता है।


FAQs

1. क्या हर साल नए रथ बनाए जाते हैं?
हाँ, पुरी रथयात्रा के लिए हर साल नए रथ बनाए जाते हैं।

2. रथ निर्माण में कौन-सी लकड़ी का प्रयोग होता है?
मुख्यतः साल, नीम और सिंचुआ लकड़ी का उपयोग होता है।

3. क्या रथ निर्माण करने वाले कारीगर बदलते हैं?
नहीं, यह कार्य केवल विशेष परिवारों द्वारा किया जाता है जो पीढ़ियों से इसे निभा रहे हैं।

4. रथयात्रा में कितने लोग शामिल होते हैं?
हर साल करीब 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं।

5. क्या रथयात्रा को टीवी पर देखा जा सकता है?
हाँ, इसका सीधा प्रसारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चैनलों व यूट्यूब पर भी होता है।